भीम:-
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।
फिर भी तू भूला उनको, जीता जिनकी बदौलत है।
तेरे पास ........................................................।
हम सब की खातिर भीम
ने, कितने कष्ट झेले हैं।
सम्मान दिलाने को, कितनी अपमान झेले हैं॥1॥
देश में जो सौहरत है, भीम की बदौलत है।
तेरे पास ........................................................।
नहीं था नसीब पानी, हम सबको पीने को।
आज हर घर में देखो, बिस्लरी का पानी है॥
नही था नसीब खाना, हम सबको खाने को।
आज घर-घर में देखो, चलती बिरियानी है॥
नहीं है देन तैतीस करोड, देवी देवताओं की।
ये तो अपने डा. भीम राव की महरबानी है॥2॥
जीने की महौलत है, भीम की बदौलत है।
तेरे पास ........................................................।
देश में आडंवर, अभी तक फैले हैं।
मनुवदिओं के भक्त, आज भी बैठे हैं॥
इन मनु भक्तों को भीम
की जरूरत है॥3॥
तेरे पास ........................................................।
गीत: “भीम की बदौलत”
(Tathagat Neetesh Shakya)
(लोकगीत / जागरूकता गीत शैली)
मुखड़ा
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।
फिर भी तू भूला उनको, जीता जिनकी बदौलत है।।
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।।
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अंतरा 1
हम सब की खातिर भीम ने, कितने कष्ट झेले हैं।
सम्मान दिलाने को, कितने अपमान झेले हैं।।
अँधियारे में दीप जलाया, टूटी उम्मीदों को सहलाया,
देश में जो शोहरत है, भीम की बदौलत है।।
मुखड़ा
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।।
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अंतरा 2
नहीं था नसीब पानी, हम सबको पीने को।
आज हर घर में देखो, मिलता साफ़ पानी है।।
नहीं था नसीब खाना, हम सबको खाने को।
आज घर-घर में देखो, खुशियों की रवानी है।।
नहीं है देन तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं की,
ये तो अपने बाबा साहेब की मेहरबानी है।।
जीने की मोहलत है, भीम की बदौलत है।।
मुखड़ा
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।।
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अंतरा 3
देश में आडंबर अब भी, हर ओर फैले हैं।
मनुवादी सोच वाले, अब भी यहाँ बैठे हैं।।
जो अधिकार मिला हमको, संघर्षों से पाया है,
संविधान की ताकत ने, सबको आगे लाया है।।
इन मनु भक्तों को भी, भीम की जरूरत है।।
मुखड़ा
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।।
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अंतरा 4 (नया)
शिक्षा का जो दीप जला, वो भीम ने जलाया था।
सोए हुए समाज को, इंसान बनाना सिखाया था।।
कलम की ताकत देकर, हर जंजीर तोड़ी है,
सदियों से दबे लोगों की, किस्मत नई जोड़ी है।।
हर दिल में इबादत है, भीम की बदौलत है।।
मुखड़ा (समापन)
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।
फिर भी तू भूला उनको, जीता जिनकी बदौलत है।।
तेरे पास दौलत है, भीम की बदौलत है।।

nice good
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteGood lins
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